शनिवार, 28 मई 2011

एक डरावना चुटकला.

यह एक डरावना चुटकला है. कृपया कर कमजोर दिल वालो से प्रार्थना है की वो इसे ना पढ़े.
रात बहुत हो गई थी. सड़क भी सुनसान सी ही थी. इस पर बरसात ने माहौल को और अधिक डरावना कर दिया था. बावजूद इसके एक बुढ़ा आदमी एक सड़क के किनारे अपनी किताबे बेचने की स्टाल लगा कर बैठा था. बेचारा करता भी क्या. इतनी बरसात में कहाँ जाता. इतने में दूर से एक गाड़ी की लाईट नजर आई. उसके चेहरे पर
हलकी मुस्कान दौड़ गई.

गाड़ी उसकी स्टाल के पास आकर ही रुकी. गाड़ी में बैठे-बैठे आदमी ने एक किताब उठाई और बूढ़े आदमी को 300 रूपए दे दिए. लिफाफे में किताब डाल कर बूढ़े आदमी ने गाड़ी वाले को देते हुए कहा की जब तक कोई मुसीबत ना आये किताब का आखिरी पेज खोल कर मत देखना. आदमी ने पूरी किताब पढ़ डाली लेकिन कभी आखरी पेज खोल कर नहीं देखा.

एक दिन उससे रहा नहीं गया और आखरी पेज खोल कर देख लिया. पेज पर नजर पड़ते ही उसकी मौत हो गई.

आखरी पेज पर लिखा था...

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