गुरुवार, 14 नवंबर 2013

अच्छा फिर मिलते हैं...........

एक गाँव है जहाँ कुछ घर है मिटटी के
शाम होते ही उन घरो में,
फ़ैल जाती है मध्यम रोशनी |
अक्सर मिल बैठ कर मानते हैं वे लोग
शाम का जश्न |
पहली बार गया था मैं वहां, अपरचित था उनके लिए |
पर कुछ घंटों में वे सब, अपने से लगने लगे |
जब से लौटा हूँ वापस, यही लगता है,
छोड़ आया हूँ अपना ही कोई हिस्सा, उस गाँव में |
एक वे हैं गाँव के सीधे सच्चे लोग
एक हम हैं शहर के पढ़े लिखे लोग
जो पूरी जिंदगी यही करते हैं
कैसे हो ? मैं ठीक हूँ !
अच्छा फिर मिलते हैं ...... नमस्ते......

फिर वही अकेलापन......

फिर वही .हाँ फिर वही 
सूनापन .

फिर वही सड़क पर आते-जाते 
लोगों को देखना एकटक.....

फिर वही घड़ी में बार-बार 
देखना समय......

फिर वही डोर बेल के 
बजने का इंतज़ार....

फिर वही मोबाइल पर 
चेक करना मिस्ड कॉल.......

फिर वही पलंग पर लेटे-लेटे 
पंखे को देखना.....

फिर वही फ़ेसबुक पर 
दोस्त ढूँढना .अपनी पोस्ट को 
कितनों ने लाइक किया, 
अधीर होकर गिनना.....

फिर वही जाने - अनजाने लोगों के 
ट्वीट्स में संवाद तलाशना.....

फिर वही टेबल लैंप का स्विच 
बार - बार ऑन करना 
ऑफ़ करना .सोचने के लिए 
कोई बात सोचना.....

फिर वही डेली सोप में 
मन लगाना .धारावाहिक के 
पात्रों में अपनापन खोजना .
उनकी कहानी में डूबना - उतरना,
उन्ही के बारे में अक्सर सोचना.....

फिर वही टीवी के 
चैनल बदलते रहना .
फिर वही सच्ची - झूठी 
उम्मीद बुनना......

फिर वही हर बीती बात की 
जुगाली करना. फिर वही 
वक़्त की दस्तक सुन कर 
चौंकना......

फिर वही दिन - रात को 
खालीपन के धागे से सीना.....

फिर वही बेचैनी,
अनमनापन.....

फिर वही 
अकेलापन .

रविवार, 3 नवंबर 2013

Happy Dipawali.....


हम ईश्वर से प्रार्थना करते है कि वो आपको और आपके
परिवार को इस दीपावली से अगली दीपावली तक

शान्ति,
शक्ति,
सम्पत्ति,
स्वरुप,
संयम,
सादगी,
सफलता,
समृद्दि,
संस्कार,
स्वास्थ्य,
सम्मान,
सरस्वती,
और स्नेह
प्रदान करे

हमारे तरफ से आप पुरे परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना........

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

दो बातें…….

दो बातें…….
पहली……
मैं ऐसा इन्सान नहीं की कोई एक थप्पड़ गाल पर मारे और मैं दूसरा उसके सामने कर दूँ…… उसका गाल लाल क्या काला  करदूं…….

दूसरी……..
यदि कोई हमारे लिए जरा सा झुके उसके लिए सर कटाने के लिए तैयार रहता हूँ…….

इसका , मतलब ये नहीं मैं महात्मा गाँधी से नफ़रत करता हूँ…… ज्यादा से ज्यादा सत्य बोलने की कोशिस करता हूँ…… कभी कभी अहिंसा भी कर लेता हूँ…… परन्तु हमेशा सत्य के साथ रहता
हूँ……।  


सोमवार, 9 सितंबर 2013

गणपति बाप्पा मोरया.......

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हे गणेश जी! आप महाकाय हैं। आपकी सूंड वक्र है। आपके शरीर से करोडों सूर्यो का तेज निकलता है। आपसे प्रार्थना है कि आप हमारे सारे कार्य निर्विध्न पूरे करें।
गणपति बाप्पा मोरया.......
मंगल मूर्ति मोरया........

शनिवार, 7 सितंबर 2013

साथ चलो हमारा मित्र बन कर......

मेरे पीछे मत चलो, हो सकता है मैं नेतृत्व ना कर पाऊ……
मेरे आगे चलो हो सकता है मैं अनुगमन कर सकूँ………. 
सबसे अच्छा हमारे साथ चलो हमारा मित्र बन कर 
हमेशा  साथ निभाऊंगा एक मित्र बन कर..........

.

बुधवार, 17 जुलाई 2013

मर ना सके हम.......

मर ना सके हम तुझसे बिछड़ने के बाद
इस दुनियां में  है जी कर क्या करना.......
क्या कहूँ मैं तुझसे बिछड़ने  के बाद
तेरी यादों में है जीना बड़ी बात........

सोमवार, 8 जुलाई 2013

पापा तुम कब आवोगे.......


एक बच्चे की  ब्यथा.......

कह कर गए थे पापा
जल्द लौट के आयेंगे.........
हिमालय की पावन छटा से
खिलौना एक लायेंगे........
दर्शन करने  चार धाम गए
पुण्य बहुत कमाएंगे.........
संग मम्मी दादी भी गयी
पतित पावनी गंगा में नहलायेंगे.........
छुटियाँ हो रही ख़त्म
कब आ स्कूल पहुचाएंगे.........
मुनिया दीदी कह रही थी
पानी पानी सब हुआ............
पानी में सब वहा बहा
पापा तुम जल्दी कब आवोगे.......

कोई कुछ भी पूछता है...........

कोई जाति पूछता है...........
कोई धर्म पूछता है...........
कोई उम्र तो पूछता है...........
कोई धंधा पूछता है...........
कोई नहीं पूछता...........
मेरा ह्रदय कैसा है...........
मेरा ज्ञान कितना है...........
इमानदार हूँ ...........
या बेईमान हूँ ...........
जैसा दिखता हूँ ...........
वैसा हूँ या बाहर कुछ अन्दर
कुछ और हूँ ...........
निरंतर तुम इंसान हो ...........
या इंसान के रूप में ...........
हैवान हो...........
मन को अच्छा लगेगा ...........
जब कोई ये प्रश्न करेगा...........

जीने को जी करता है.......

आब ना रुलाओ हमें की दर्द बढ़ने सा लगता है.......
सुखी हुयी पलको में नमी सा होने लगता है........

अब तो हसने की चाहत भी ना रही.......
फिर भी तुम्हे देख कर जीने को जी करता है.......

दर्पण टूट जाता है......

अक्सर चोट लगने से दर्पण टूट जाता है......
पर छवि वैसे की वैसे ही रहती है.......
ठीक उसी तरह

आदमी से रूठ जाते हैं सभी........
मगर समस्याएं कभी रुठती ही नहीं..........
समस्याएं वैसे की वैसे ही रहती है.......


श्याम विश्वकर्मा

मंगलवार, 2 जुलाई 2013

सुनो लड़की......

आजकल की लड़कियां जिन्हें कच्ची उम्र में प्यार करने का शौक होता है वह कितना भयानक होता है. अक्सर लड़कियां चौदह पन्द्रह साल की उमर में प्यार की गलियों की सैर करनीलगती हैं जिसके परिणाम बेहद घातक साबित होते है.

आजकल का विषय बलात्कार है जिसकी एक वजह शायद कहीं ना कहीं लड़कियां का अधिक भोलापन भी है जिसकी वजह से वह बहुत जल्दी भटक जाती हैं. फिलहाल आप इस कविता के मर्म को समझिए, हो सकता है आपको भी कवि की भावना समझ आ जाए.......



" सुनो लड़की "
अभी तुम इश्क मत करना,
अभी गुड़िया से खेलो तुम,
तुम्हारी उम्र ही क्या है,
अभी मासुम बच्ची हो,
नहीं मालूम अभी तुमको,

कि जब ये इश्क होता है,
तो इंसान कितना रोता है,
सितारे टूट जाते हैं, सारे छुट जाते है,
सहारे छुट जाते हैं,
अभी तुमने नहीं कि जब साथी बिछड़ते हैं,
तो कितना दर्द होता है,

हजारों गम उभरते हैं,
हजारों जख्म खुलते हैं,
सुनो लड़की मेरी मानो पढ़ाई पर तवज्जों दो,

किताबों में गुलाब को नहीं रखना,
किताबें जब भी खुलेंगी तो ये कांतो कि तरह दिल में चुभने लगेगी,
किसीको खत मत लिखना,
लिखाई पकड़ी जाती है,
बड़ी रुसवाई होती है,

किसीको फोन मत करना,
वो आवाजें सताती हैं,
मेरी नज्में नहीं पढ़ना,
ये तुम्हें पागल बना देंगी,

सुनों लड़की मेरी मानो तुम अभी इश्क मत करना,
अपनी तकदीर से तुम खुलके मत लड़ना 
अभी तुम गुड़िया से खेलो,

अभी तुम इश्क मत करना........
 " श्याम विश्वकर्मा "

मैं एक कोशिश कर रहा हूँ..............

मैं एक कोशिश कर रहा हूँ सरहदें पाटने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ दूरियां मिटाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ उस फासले को काटने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ सबको अपना बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक खुला आस्मान बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ एक नयी दुनिया बनाने की..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ  अपना विश्वकर्मा समाज बनाने की..............
मैं कोई ग़ैर नही तुम्हारा अपना ही हूँ..............
बस वक्त ने हमारे बीच यह फासला बो दिया है..............
मुझे मत रोको, मेरे जज्बातों, मेरे ख्यालों, मेरे ख्वाबों को उड़ने दो..............
मैं एक कोशिश कर रहा हूँ..............
बस एक कोशिश.............. " श्याम विश्वकर्मा "

सोमवार, 3 जून 2013

चले आओ कि मुझको अब अकेलापन सताता है.........
तुम्हारी याद में खोया हुआ गुलशन सताता है........
मिले थे जब हम और तुम  हो गयी थी तेज बारिश.........
मुझे पहले मिलन का अब वही सावन सताता है.........

गुरुवार, 23 मई 2013

अब तो सो जाने दो मुझे..........

अब तो सो जाने दो मुझे.....
पर कम्बखत अकेले नीद नहीं आती.....
जब सुबह उठाना चाहता हूँ.......
तो ये निदिया रानी कहती है सो जाओ.........

रात में सोने नहीं देती है......
सुबह कहती है अभी उठाने का समय नहीं है........
अब क्या करूँ दोस्तों मुझे समझाओ.......
सोऊ या जागूँ कुछ तो उपाय बताओ............

मंगलवार, 21 मई 2013

यादें क्या है?

वो तो दर्पण है अतीत का.......
जब बचपन की यादें आती.......
तो मैं बच्चा बन जाता हूँ.......
माँ के आंचल में खेल रहा हूँ......
जब बहुत याद आता बचपन.....
पुलकित होता मेरा तनमन.......
काश मैं फिर से बच्चा बन जाऊं......
ऐसा कहता है मेरा मन........

सोमवार, 20 मई 2013

दहेज... एक बहुत बड़ी कु प्रथा

दहेज... एक बहुत बड़ी कु प्रथा,
जिसे लोग आज मान सम्मान मानते है,
हमारे हिसाब से भीख से बढ़ कर ही है,
पहले ये बड़े धनि लोग अपनी कन्यां को देते थे,
परन्तु उनकी देखा देखि सभी लोग देने लगे,
ये उचित नहीं है, परन्तु लेने के टाइम लड़के का बाप मांगता है भिखारी की तरह,
और वही बाप गिडगिडाता है देने के समय,
हम उन सभी भाई से निवेदन करते हैं, ना कुछ लो ना कुछ दो,
आप बदलो समाज अपने आप बदलेगा,
सभी बहनों से भी आग्रह करता हूँ की ऐसे दहेज लोभियों का बहिस्कार करो,
आज कन्या का अनुपात कम है, अपने आप लालचियों का लालच कम हो जायेगा,
दहेज मांगना एक प्रकार से भीख मांगना है

रविवार, 19 मई 2013

हँसना भी भूल गए.......

हम  तो हँसना  भी भूल  गए.......
मुश्कारना तो याद ही नहीं रहा..........
तेरे सिवा जीने  का बहना भी याद नहीं रहा.....
बिछड़ कर तेरी यादो में.......
अब जीना भी याद ना रहा......

याद नहीं .............

अब तो याद नहीं वो चेहरा......
भुला ही सही धुंधला सा याद है.....
पर  वो मुश्कान आज भी याद है.......
बिन बात के खुल कर हसना भी याद है........

रविवार, 12 मई 2013

ज़िन्दगी एक सड़क है

ज़िन्दगी एक सड़क है, सुख -दुःख की तड़प है
चलती है ज़िन्दगी, दौड़ती है जिंदगी
भागती है जिंदगी, हारती है जिंदगी
आना है जाना है , खोना है पाना है
हर मोड़ जिंदगी बेजोड़ है, न कोई तोड़ है न जोड़ है

किसकी याद में पागल पल पल रोता है
जिंदगी सड़क है, कुछ मिलता है कुछ खोता है
फुटपाथ पर जिंदगी जो सोता है
महल क्या जाने कितना वो रोता है
सड़क भी नहीं सोता, रात भर रोता है
फुटपाथ के साथ रात भर जगता है

हर सुख दुःख का दर्पण है सड़क
जिंदगी का समर्पण है सड़क
थक चुकी है हार चुकी है,
कुचल चुकी है उलझ चुकी है
फिर भी चलती जा रही है, भागती जा रही है
प्यार के तलाश में एक नए आश में
जिंदगी की सड़क या सड़क की जिंदगी

अनंत है जिंदगी की सड़क,सुख दुःख की तड़प
ना कोई किनारा है ना पड़ाव है, हर पल भगाव है
लड़खड़ा कर गिरती, उठती फिर गिरती
रफ़्तार है जिंदगी लाचार है जिंदगी
बस भागना है सफ़र नापना है
कुछ पाना है और कुछ खोना है
खोया हुआ पड़ाव है सड़क
हर पल नया जुडाव है सड़क
सच योगी जिंदगी एक सड़क है !

यह कविता क्यों ? जिंदगी एक सड़क है सबको भागना है यहाँ से पर जाना कहाँ है नामालूम है सब चले जा रहे हैं सो हम भी चले जा रहे हैं एहसास है क्या पा रहे हैं क्या खो रहे हैं यादों की धुल समेत रहे हैं पर खुद सोचे तो सच जिंदगी एक सड़क है !

शनिवार, 11 मई 2013

माना की......

माना की चाहत बड़ी थी
पर मेरे इंतजार की भी कोई कीमत थी
हम तो आज भी उन रस्ते पे इंतजार करते बैठे है....
कम्बखत ओ तो पहचानने से भी इंकार करते है......

माना की दर्द बहुत है...........

माना  की दर्द  बहुत है जिंदगी में,
यादों से ज्यादा दर्द क्या होगा.....
आप और हम तो जीते हैं देश के लिए .....
हमसे खुश नसीब और  कोई क्या होगा.....

अब तो याद आती है...............

अब तो याद आती है, आ जाने दो उन यादों को,
भूली बिसरी ही सही, अब तो भूल जाने दो.....

माना की आज भूल नहीं पाते  है उसको,
अब यादों में ही सही भूल जाते है उसको......

रविवार, 28 अप्रैल 2013

सच बोलने में अब मजा नहीं है................

क्या बात है यारों
अब मैं भी भूलने लगा हूँ.......
भूलते भूलते ही सही
कुछ तो याद आने लगा है
......................................
यादों  में भी अब दर्द होता है
भूलने में भी यादे होती है
सच बोलने में अब मजा नहीं है
अब तो झूठ में ही मजा आने लगा है......

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

हिन्दू नव वर्ष एवं नवरात्री पर्व की हार्दिक शुभकामनाये......

आप सभी को नववर्ष विक्रमी संवत २०७०, ११ अप्रैल २०१३, 
गुडी पडवा एवं नवरात्री पर्व की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाये...... 
 नया वर्ष आप सभी के जीवन में उत्साह, उमंग, सुख-समृद्धि, ऊर्जा और 
खुशियों भरे शुभ संदेश के साथ अंधेरा हौले-हौले उजाले में तब्दील होगा। 
सूर्य की किरणें वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाएंगी। 
उगते हुए सूरज पर अर्घ्य के रूप में चढ़ती पानी की धार हर इंसान के दुखों 
को दूर कर शरीर में ऊर्जा का संचार करेंगी। नववर्ष सबके लिए सुख-संमृद्धि 
एवं वैभवपूर्ण हो, और आशा करता हूँ कि नववर्ष आप सभी के लिए मंगलमय 
एवं लक्ष्य प्राप्ति से भरपूर हो साथ ही नव वर्ष में आशानुरूप सफलता की प्राप्ति 
लिए कामना करता हूँ।

 श्याम विश्वकर्मा.......

रविवार, 7 अप्रैल 2013

भूली बिसरी यादें.......

चलो गाँव के आम की छाँव में बैठें......
भूली बिसरी यादों को ताज़ा कर बैठें.......
बचपन के खेल निराले याद कर बैठे.......
आज फिर उस खेल को खेलने बैठे.......


चलो  कही दूर चले जाते है.....
ये शहर और ये दुनियां  को छोड़ जाते है......
अपना पन  अब  दीखता ही कहा  है......
फिर से माँ की गोदी में सो जाते है.....


क्यूँ जी चाहता है की बचपन में लौट जाऊ......
क्यूँ जी चाहता है माँ का अंचल पकड कर रोऊँ......
अब तो फुर्सत ही नहीं मिलता दो पल चैन से बैठने को....
बस अब तो भाग दौड़ के दो पल की रोटी को कैसे जुटाऊं........

शनिवार, 23 मार्च 2013

कुछ दिन से फुर्सत नहीं......

कुछ दिन से फुर्सत नहीं रहती कि कुछ सोच सकूँ......
फिर भी  जागती आँखों में ही  कई  सपने पलते हैं.......
कौन कहता है की खुली आँखों से सपने नहीं देख सकते
हम तो सपनो में भी जागते रहते है.......

गुरुवार, 14 मार्च 2013

अपने सपने.......

दिन इतनी जल्दी बीत जाती है......
रातें क्यूँ नहीं कटती है कोई तो बता दे.......
अपने सपने तो पुरे हुवे नहीं अभी........
अबतो बच्चो के सपने भी जुड़ गए......

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

बिछडन.......

मत पूंछो  
मत पूंछो
अब तो पूंछो ही मत
क्या होती है बिछडन
किसी से बिछड़ना मत
फिर भी एक बार किसी से बिछड़ के देखो.....

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

आईना.......

आईना ना दिखाओ हमें
हम तो आईना के ब्यापारी हैं.......
हमने तो टूटते हुवे देखा है अपने सामने
क्या अब आप की बारी है........

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

शहर दौड़ा जा रहा है......

शहर दौड़ा जा रहा है न जाने कहाँ के लिए.
फिर भी ज़िन्दगी इतनी आहिस्ता सी दिखती है क्यों.....

मत पूछो......

मत पूछो जिंदगी का सफ़र कैसा है............
जो बीत जाये अच्छे से वही स्वर्ग जैसा है........

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